Wednesday, 27 July 2016

बिजनेस स्टैण्डर्ड की राजस्थान राउण्ड टेबल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन सत्र - नम्बर बढ़ाने के लिए नहीं, वादे निभाने के लिए कर रहे हैं काम - मुख्यमंत्री



जयपुर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा है कि हम टीआरपी की तरह अपने नम्बर बढ़ाने के लिए नहींअपितु लोगों से किए गए वादे निभाकर उन्हें राहत देने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से आज विकास के क्षेत्र में राजस्थान मॉडल देश और दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है। श्रीमती राजे बुधवार को यहां होटल मेरियट में बिजनेस स्टैण्डर्ड की राजस्थान राउण्ड टेबल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि निवेश के अनुकूल माहौल, श्रम सुधारों, आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण,ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे कदमों से प्रदेश देश-दुनिया का पसंदीदा निवेश स्थल बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग प्रायः नकारात्मक चीजों की तरफ ही ध्यान देते हैं, जबकि उन्हें सकारात्मक पक्ष की ओर भी ध्यान देकर उसे लोगों को बताना चाहिए। इस दिशा में मीडिया की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण होती है। गलतियां वहीं होती है जहां काम होता है। उन्होंने मीडिया से अपेक्षा की कि राजस्थान के विकास के लिए राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग दें और राज्य में किए जा रहे जनहित के कार्यों एवं योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के लिए मीडिया हमारा साझेदार भी बने। उन्होंने महिला सशक्तीकरण की दिशा में भामाशाह योजना को एक अभिनव पहल बताते हुए कहा कि यह देश में पहली ऎसी योजना है जिसके माध्यम से पात्र लोगों के खातों में योजनाओं का लाभ सीधे पहुंच रहा है।     मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन में राज्य में कौशल विकास, रोजगार के अवसर बढ़ाने, अप्रासंगिक हो चुके कानूनों को खत्म करने सहित गत ढाई साल में प्रदेश में हो रहे चहुंमुखी विकास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्टार्टअप पॉलिसी, पर्यटन क्षेत्र में हुए विकास, रिसर्जेंट राजस्थान के माध्यम से 370 लाख करोड़ रुपये के एमओयू से राज्य के विकास में होने वाले दूरगामी परिणामों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि नवम्बर माह में कृषि क्षेत्र में देश और दुनिया में हो रहे तकनीकी विकास और नवाचारों की जानकारी राज्य के किसानों को देने के उद्देश्य से राजस्थान ग्लोबल एग्रीटेक मीट (ग्राम) का आयोजन किया जा रहा है, जिससे हमारे कास्तकार भी खेती में नवाचारों के साथ अपने जीवन में बदलाव ला सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में औद्योगिक क्षेत्र में भी सिंगल विण्डो प्रणाली सहित अनेक प्रोत्साहन देने की वजह से राजस्थान निवेशकों के लिए एक आदर्श राज्य बन चुका है।श्रीमती राजे ने बताया कि आज लोग देख रहे हैं कि राजस्थान में विकास का परिदृश्य बदल रहा है। आने वाले ढाई सालों में राजस्थान हर क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से हमने ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान‘ को जन अभियान बनाया, जिससे इसके तहत निर्मित कुएं, तालाब, टांके आदि इस मानसून में पानी से लबालब हो रहे हैं। अब हम इन जल संग्रहण ढांचों के आस-पास 25 लाख पौधे लगा रहे हैं। इनमें से यदि 40 प्रतिशत पौधे भी जीवित रहते हैं तो भविष्य में 10 लाख पेड़ बनेंगे जो लोगों को राहत देने के साथ वर्षा को आकर्षित कर सकेंगे। ये हमारा पहला प्रयास है और इस वर्ष नवम्बर में जल स्वावलम्बन अभियान का दूसरा चरण भी आरम्भ होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘न्याय आपके द्वार अभियान‘ के माध्यम से गांवों में राजस्व विवादों का निपटारा कर करीब 69 लाख परिवारों को राहत देने के प्रयासों किए गए हैं। गत दो वर्षाें में इस अभियान से 584 गांव वाद मुक्त हुए हैं। उद्घाटन सत्र की शुरूआत में बिजनेस स्टेण्डर्ड के संपादक श्री ए.के. भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे के विजन से राजस्थान विकास की राह पर निरन्तर आगे बढ़ रहा है। राउण्ड टेबल कॉन्फ्रेंस में उद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती वीनू गुप्ता, सीआईआई, राजस्थान के चेयरमैन श्री रजत अग्रवाल, कजारिया सेरेमिक्स के चेयरमैन एवं एमडी श्री अशोक कजारिया, जेके टायर एण्ड इण्डस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री अरूण कुमार बाजोरिया, होलीडे आईक्यू के सीईओ श्री हरि नायर सहित बड़ी संख्या में उद्योग जगत के लोग उपस्थित थे।

Saturday, 23 July 2016

मुख्यमंत्री का आधिकारिक मोबाइल एप लॉन्च

मुख्यमंत्री का आधिकारिक मोबाइल एप लॉन्च जयपुर, 23 जुलाई।  मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने शनिवार को होटल मेरियट में अपना आधिकारिक मोबाइल एप लॉन्च किया। इस एप के माध्यम से प्रदेशवासियों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की ताजा जानकारी मिल सकेगी। ’वसुन्धरा राजे’ मोबाइल एप के माध्यम से आमजन मुख्यमंत्री के साथ सीधा संवाद भी कर सकेंगे और दस्तावेज या फोटो अपलोड कर सकेंगे। इस एप में इंटीग्रेटेड सर्विस डिलीवरी एवं शिकायत समाधान सिस्टम भी है। साथ ही, राज्य सरकार अन्य एप्स के लिंक एवं राजस्थान के विकास से जुड़े इंफोग्राफिक्स उपलब्ध हैं। इस एप के माध्यम से मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान में आर्थिक सहयोग किया जा सकता है। इस पर मुख्यमंत्री के भाषण, संदेश एवं साक्षात्कार भी उपलब्ध हैं। 

उदयपुर जिले में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान -द्वितीय चरण में 87 ग्राम पंचायतों के 258 गांव चिह्नित




  जयपुर, 23 जुलाई। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के द्वितीय चरण के लिए उदयपुर जिले में व्यापक स्तर पर तैयारियां आरंभ हो गई हैं और अभियान को मूर्त रूप दिया जा रहा है। जिला कलक्टर श्री रोहित गुप्ता की अध्यक्षता में शनिवार को उदयपुर जिला परिषद सभागार में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के द्वितीय चरण के लिए जिलास्तरीय प्रशिक्षकों की प्रशिक्षण कार्यशाला हुई। इसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी अविचल चतुर्वेदी, जल ग्रहण क्षेत्र विकास के अधीक्षण अभियन्ता आर.के. अग्रवाल एवं अन्य अधिकारियों ने संबोधित किया और द्वितीय चरण के बारे में जानकारी दी। जिला कलक्टर श्री गुप्ता ने सभी कामों में समय और गुणवत्ता पर ध्यान देने के निर्देश दिए और कहा कि सभी संबंधित विभाग अधिक से अधिक काम हाथ में लें।     कार्यशाला में प्रथम चरण के अनुभवों को सामने रखकर निर्णय लिया गया कि पूर्व के अनुभवों से सीख कर द्वितीय चरण को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। द्वितीय चरण में जिले की 87 ग्राम पंचायतों मेंं 258 गांवों को चिह्नित किया गया है जहां जल स्वावलम्बन अभियान के काम चलाए जाएंगे।

राजस्थान सरकार की आमजन के लिए विभिन्न सहायता योजनाएँ

इस संसार में परोपकार करने की भावना लगभग हर व्यक्ति में होती है। हमारे अपने भीतर भी ऎसे विचार आते हैं किंतु सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण हम प्रायः जीवन में दो-चार हजार रुपये की चैरिटी करके आत्मसंतुष्टि प्राप्त कर लेते हैं किंतु एक ऎसा तरीका भी है जिसके माध्यम से हम अपने पास-पड़ौस में रहने वाले अथवा अपने घर में काम करने वाले किसी निर्धन व्यक्ति या परिवार को इतनी आर्थिक मदद पहुंचा सकते हैं कि उस परिवार का पूरा भविष्य ही बदल जाये। इस कार्य में हमारी जेब से कोई रुपया खर्च नहीं होगा, राजस्थान सरकार के बहुत से ऎसे विभाग हमारे इस पुण्य कार्य के लिये रुपया खर्च करने को तैयार हैं।       राजस्थान सरकार ने वर्तमान में विभिन्न विभागों के माध्यम से एक सौ से अधिक ऎसी योजनाएं चला रखी हैं जिनके माध्यम से आप गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता दिलवा सकते हैं। झालावाड़ जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने इन योजनाओं में से 89 ऎसी योजनाएं चुनकर एक पुस्तिका तैयार करवाई है जो पूरी तरह से जन्मजात कन्याओं से लेकर, स्कूली बालिकाओं, प्रौढ़ महिलाओं, विधवाओं, एकल महिलाओं, परित्यक्ताओं तथा वृद्धाओं के लिये समर्पित हैं। इनमें से 40 योजनाएं प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभागों के माध्यम से, 28 योजनाएं सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग के माध्यम से,           15 योजनाएं श्रम कल्याण विभाग के माध्यम से, 3 योजनाएं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से तथा 3 योजनाएं महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित की जाती हैं। मैं यहां केवल तीन बड़ी योजनाओं की चर्चा कर रहा हूँ जिनका लाभ आप किसी गरीब परिवार को तुरंत दिलवा सकते हैं। वह परिवार जीवन भर आपका अहसानमंद रहेगा। राजश्री योजना राजस्थान सरकार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से 1 जून 2016 से राजश्री योजना आरम्भ की है। इस योजना में किसी महिला को चिकित्सा संस्थान में पुत्री को जन्म देने पर तुरंत 2500 रुपये दिये जाते हैं। बालिका के जन्म की प्रथम वर्षगांठ पर पुनः 2500 रुपये दिये जाते हैं। जब बालिका किसी सरकारी स्कूल में कक्षा 1 में प्रवेश लेती है तो उसे 4000 रुपये दिये जाते हैं। बालिका द्वारा कक्षा 5 में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये, कक्षा 10 में प्रवेश लेने पर 11 हजार रुपये तथा कक्षा 12 उत्तीर्ण करने पर 25 हजार रुपये की राशि बालिका की मां को दी जाती है। इस प्रकार एक बालिका के पालन-पोषण के लिये उसकी मां को पचास हजार रुपये दिये जाते हैं। एक माता को यह सहायता दो बालिकाओं तक के लिये दी जा सकती है। इस बालिका को जननी शिशु सुरक्षा योजना के अंतर्गत मिलने वाले 1400 रुपये (ग्रामीण क्षेत्र में) अथवा 1000 रुपये (नगरीय क्षेत्र में) अलग से मिलेंगे तथा अन्य विभागों से मिलने वाली योजनाओं का लाभ भी मिलेगा। प्रसूति सहायता योजना यदि कोई महिला श्रम कल्याण विभाग में श्रमिक के रूप में पंजीकृत है तो उसके प्रथम प्रसव में लड़का होने पर 20 हजार रुपये तथा लड़की होने पर 21 हजार रुपये श्रम कल्याण विभाग द्वारा दिये जाते हैं। पुत्री के जन्म के समय माता की आयु कम से कम 20 वर्ष होनी चाहिये तथा पुत्री का जन्म किसी चिकित्सा संस्थान में होना चाहिये (घर पर नहीं)। कोई भी श्रमिक महिला प्रथम दो प्रसवों पर अर्थात् जीवन में कुल दो बार यह सहायता राशि प्राप्त कर सकती है। इसके लिये श्रम कल्याण विभाग में आवेदन करना होता है। विवाह सहायता योजना यदि कोई महिला श्रम कल्याण विभाग में निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीकृत है तो वह अपनी दो पुत्रियों के विवाह के लिये 55-55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता, उस पुत्री के 18 साल अथवा उससे अधिक आयु होने पर श्रम विभाग से ले सकती है। इसके लिये 18 साल पूरे करने वाली लड़की का आठवीं पास होना जरूरी है। आसान है श्रमिक के रूप में पंजीयन करवाना      जो स्त्री या पुरुष साल भर में किसी संस्थान में, किसी के घर पर या किसी ठेकेदार के पास कम से कम 100 दिन तक निर्माण श्रमिक के रूप में मजदूरी करते हैं, वे अपना पंजीयन श्रम कल्याण विभाग में आसानी से करवा सकते हैं। पांच साल के पंजीयन के लिये 85 रुपये पंजीयन शुल्क लगता है।

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे की दूरदर्शी सोच से राजस्थान पा रहा सुनहरे आयाम

सदियों से पानी की समस्या से जूझ रही मरुधरा राजस्थान के इतिहास में यह पहला मौका है जब बारिश का इतना बेसब्री से इंतजार हो रहा है जैसा पहले कभी नहीं रहा। अबकि बार पूरा का पूरा राजस्थान जैसे उठ खड़ा हुआ है वर्षाऋतु की जोरदार अगवानी में। हर तरफ उल्लास का माहौल पसरा हुआ है। पूरे उत्साह और उमंग के साथ राजस्थान प्रदेशवासी उत्सुक हैं बारिश के स्वागत में। प्रदेश का कोना-कोना इस बार पावस से खुशहाली पाने के स्वप्नों में रमा हुआ है। जन समुदाय अब अहर्निश इसी तीव्रतर प्रतीक्षा में है कि बारिश कब हो, और अर्से से प्यासी धरा सरसब्ज हो। बात मैदानी हिस्सों की हो, रेगिस्तानी इलाकों की, या फिर पहाड़ी क्षेत्रों की। राजस्थान भर की सरजमीं पूरे उत्साह से आतुर है पानी भरे बादलों से आलिंगन को। राजस्थान रच रहा अपूर्व इतिहास नदी-नालों, झील-तालाबों से लेकर कूओं-बावड़ियों और तमाम नए-पुराने जलाशयों का उछाह भी कोई कम नहीं। उछाले मारती यह आतुरता, उत्साह और उमंग हो भी क्यों न, इस बार राजस्थान ऎसा अपूर्व स्वर्णिम इतिहास रचने जा रहा है जो सदियों तक पानी की आत्मनिर्भरता का पैगाम गूंजाता रहेगा। प्रदेश सरकार की ओर से राजस्थान को पानी के मामले में हर दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने के महत्वाकांक्षी प्रयासों का साकार स्वरूप दिखा रहे मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान ने प्रदेश का कायाकल्प ही कर दिया है। जल समस्या होगी दूर समूचे राजस्थान में बरसाती जल के संग्रहण के लिए लाखों छोटी-बड़ी जल संरचनाओं का सृजन हुआ है, पुराने और परंपरागत जल स्रोतों को आबाद किया गया है। प्रदेश भर में पुख्ता इंतजामों के साथ पूरी दूरदर्शिता और उपयोगिता को ध्यान में रखकर ऎसा जबर्दस्त काम किया गया है कि वर्षा का जल स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक संग्रहित हो, जल भण्डार समृद्ध हों ताकि साल भर पानी की उपलब्धता बनी रहे और भूमिगत जलस्तर में उत्तरोत्तर अभिवृद्धि हो। इससे राजस्थान में पानी की समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा। आने वाले समय में अभियान के शेष चरणों में सभी इलाकों में जल संरक्षण कार्य पूर्ण हो जाने के बाद राजस्थान जल संकट के कलंक से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्त हो जाएगा। जन भागीदारी का रिकार्ड मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे द्वारा ऎतिहासिक एवं तीव्रतर विकास के साथ ही राजस्थान की देश व दुनिया में इन्द्रधनुषी विकासकारी पहचान बनाने की दिशा में किए जा रहे अनथक प्रयासों की श्रृंखला में यह बहुद्देश्यीय अभियान आशातीत सफलता पा चुका है। इस अभियान को लेकर प्रदेश भर के लोगों की उत्साही और स्वैच्छिक भागीदारी ने रिकार्ड कायम किया है। हालांकि अभियान के प्रथम चरण की पूर्णता का यह अंतिम सप्ताह चल रहा है लेकिन राज्य में लगभग सभी स्थानों पर इस अभियान के कार्यों ने पूर्णता पा ली है। भरने लगे हैं जल स्रोत प्रदेश में मानसून पूर्व की बारिश में कई स्थानों पर अभियान में निर्मित जल संरचनाओं में जल संग्रहण आरंभ हो चुका है। यह अभियान की अप्रत्याशित सफलता का शुभ संकेत है।  बरसात के बाद परम्परागत जलाशयों और अभियान की बदौलत सामने आए नवीन और जीर्णोद्धारित जलस्रोतों में संग्रहित होकर वर्ष भर संचित रहने वाली जलराशि ग्रामीणों, मवेशियों व वन्य जीवों सभी के लिए उपयोगी और जीवनदायी सिद्ध होगी। लोक जीवन में आएगा सतरंगी बदलाव इसके साथ ही हरित क्रान्ति का नया इतिहास भी आकार लेने लगेगा। पहाड़ों, घाटियों, मैदानों व मरुस्थलीय क्षेत्राें में हरियाली का विस्तार होगा, खेती-बाड़ी व बागवानी को सम्बल मिलेगा वहीं मत्स्य पालन व विकास के साथ ही जलीय जीवों की जिन्दगी को भी सुकून मिलेगा। प्रदेश में जल आधारित पर्यटन क्षेत्रों के संरक्षण और विकास को मजबूती मिलेगी तथा नवीन जल पर्यटन क्षेत्र विकसित होंगे जिनसे राजस्थान के पर्यटन विकास को सुनहरे आयाम प्राप्त हाेंंगे। 25 लाख पौधरोपण एक जुलाई से     जल संरक्षण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के साथ ही साथ प्रदेश सरकार ने व्यापक स्तर पर पौधरोपण गतिविधियों को भी हाथ में लिया है। यह विशेष पौधारोपण अभियान मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के अन्तर्गत पूरे राजस्थान में चयनित सभी 3 हजार 500 गांवों में एक जुलाई से आरंभ होगा तथा इसमें 25 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसकी प्रदेश भर में पूरी तैयारी है। इससे प्रदेश में पानी व हरियाली तथा इससे संबंधित गतिविधियाें को व्यापकता के साथ मजबूती मिलेगी और लोक जीवन में सुनहरी आभा के साथ ही कई मामलों में आत्मनिर्भरता और तरक्की के साथ बदलाव का सुखद अहसास हो सकेगा। राजस्थान की इतनी बड़ी समस्या का खात्मा करने इतने कम समय में अपूर्व, ऎतिहासिक एवं सतरंगी उपलब्धियां दर्शाने वाला मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान देश भर में अपनी तरह का पहला दूरदर्शी और अनुकरणीय अभियान है जिसमें जन भागीदारी से जनता के लिए बुनियादी विकास की नींव मजबूत करने में सफलता प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री की सोच का कमाल इस अभियान के जरिये मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे की दूरगामी सोच ने जो करिश्मा कर दिखाया है वह अद्भुत और कमाल का ही है।  इस बार की बारिश  से प्रदेश बारहों मास सावन सा अहसास कराएगा, यह उम्मीद सभी को है।

Friday, 22 July 2016

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान-मानसून में बरसी मेहर ने बदली मोरन नदी एनीकट की तस्वीर



मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान-मानसून में बरसी मेहर ने बदली मोरन नदी एनीकट की तस्वीर    
  जयपुर, 19 जुलाई। गांव वालों ने बड़ी हसरतों के साथ हर साल होने वाली बारिश के पानी को इकट्ठा करने के उद्देश्य से एनीकट का निर्माण करवाया था परंतु क्षतिग्रस्त होने के कारण पिछले कई वर्षों से इस एनीकट में एक बूंद भी पानी नहीं ठहर रहा था। इन स्थितियों में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान ग्रामीणों की अधूरी हसरतों को पूरा करने वाला साबित हुआ है और जिस एनीकट में पिछले वर्षों में एक बूंद पानी नहीं ठहरा था वह आज लबालब होकर सरकार के इस अभियान की सफलता का गान करता प्रतीत हो रहा है।     जी हां, यह कहानी है डूंगरपुर जिले की झौंथरी पंचायत समिति की ग्राम पंचायत पाड़ली गुजरेश्वर स्थित मोरन नदी पर बने एनीकट की। ग्राम पंचायत के अटल सेवा केन्द्र के नीचे की ओर बहने वाली मोरन नदी पर यह एनीकट वर्षा ऋतु में नदी के माध्यम से बहकर जाने वाले पानी को रोककर गांव के खेतों की प्यास बुझाने के लिए लगभग 20 वर्ष पूर्व बनाया गया था परंतु समयांतराल में क्षतिग्रस्त होने व पाल में रिसाव होने के कारण इस एनीकट में पिछले कई वर्षों से पानी की एक बूंद नहीं ठहर रही थी और ग्रामीण अच्छी बारिश होने के बावजूद पानी को इकट्ठा नहीं कर पा रहे थे। वर्ष-दर-वर्ष बारिश में पानी आता और एनीकट बना होने के बावजूद बहकर चला जाता। पंचायत द्वारा अलग-अलग योजनाओं में दो बार इस एनीकट की मरम्मत भी करवाई गई परंतु ठोस नतीज़ा नहीं निकला। इस दौरान मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत गांव को अभियान में चयनित किया गया तो सबने मिलकर इस एनीकट की दशा सुधरवाने की ठानी। बस फिर क्या था ग्राम पंचायत के माध्यम से एनीकट की क्षतिग्रस्त पाल की मरम्मत के साथ इसकी डिसिल्टिंग का कार्य को प्रस्तावित किया गया। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत मोरन नदी एनीकट सुदृढ़ीकरण एवं गाद निकालने के कार्य के लिए 14 लाख 94 हजार की स्वीकृति जारी की गई। ग्रामीणों ने भी इस कार्य की महत्ता को समझते हुए पूरी ऊर्जा के साथ कार्य किया और तीन माह में ही इस कार्य को पूर्ण किया। इस कार्य के तहत श्रम मद पर 8.92 लाख रुपये और सामग्री मद पर 6.02 लाख रुपये की स्वीकृति से 2 हजार 184 मानव दिवस सृजित हुए। कार्य पूरा होते ही मानसून की मेहर हुई और आज पहली वर्षा में यह एनीकट पानी से लबालब भरा हुआ है। ग्रामीण बताते है कि एनीकट में पानी के ठहराव से ग्रामीणों के खेतों में सिंचाई सुविधा मिलेगी और गर्मियों में भी इस पानी का उपयोग ग्रामीण कर सकेंगे।

ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के प्रस्तावों का अनुमोदन


जयपुर, 22 जुलाई। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री सुदर्शन सेठी की अध्यक्षता में शुक्रवार को यहां शासन सचिवालय में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। जिसमें ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त करने की दिशा में हो रहे कार्यों पर विस्तृत चर्चा के साथ ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के प्राप्त 96 प्रस्तावों में से 61 प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुदर्शन सेठी ने कुछ जिलों की ग्राम पंचायतों के खुले में शौच से मुक्त होने की दिशा में चल रहे धीमें प्रयासों के प्रति चिन्ता जताते हुए ऎसे जिलों में वर्कशॉप आयोजित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इन कार्यशालाओं में संबंधित जिलों के सरपंचोंउप सरपंचों को बुलाया जाए और उन्हें इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जाए कि किस प्रकार ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में शौचालय निर्माण और उसके प्रयोग के बारे में आम जनता को जागरूक किया जा सकता है। श्री सेठी ने निर्देश दिए कि जिला कलेक्टर प्रत्येक पंचायत में एक अधिकारी स्तर का व्यक्ति नियुक्त कर शौचालयों के निर्माण की प्रगतिग्रामीणों में खुले में शौच से मुक्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों की सत्त मॉनिटरिंग करने के साथ स्वच्छता अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करना सुनिश्चित करें। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक नॉडल अधिकारी होने से ग्राम पंचायतों के ओडीएफ होने की गति में तीव्रता आएगी। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की निदेशक डॉ. आरूषी मलिक ने बताया कि वर्ष 2015-16 में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में राजस्थान का भारत प्रथम स्थान रहा है तथा बीकानेर की समस्त 290 ग्राम पंचायतें इसी वर्ष खुले में शौच से मुक्त हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि खुले में शौच से मुक्त हुए गांवों का विस्तृत दौरा किया जा रहा है और उन्हें ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन हेतु अनुदान दिया जाएगा। जिन पंचायतों ने ओडीएफ के लिए प्रस्ताव ही नहीं भेजे हैं, उन्हें तुरन्त भेजने के लिए पत्र लिखा गया है। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित शौचालय निर्माण में सहयोग करने वाले यूनीसेफ के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।