Saturday, 23 July 2016

राजस्थान सरकार की आमजन के लिए विभिन्न सहायता योजनाएँ

इस संसार में परोपकार करने की भावना लगभग हर व्यक्ति में होती है। हमारे अपने भीतर भी ऎसे विचार आते हैं किंतु सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण हम प्रायः जीवन में दो-चार हजार रुपये की चैरिटी करके आत्मसंतुष्टि प्राप्त कर लेते हैं किंतु एक ऎसा तरीका भी है जिसके माध्यम से हम अपने पास-पड़ौस में रहने वाले अथवा अपने घर में काम करने वाले किसी निर्धन व्यक्ति या परिवार को इतनी आर्थिक मदद पहुंचा सकते हैं कि उस परिवार का पूरा भविष्य ही बदल जाये। इस कार्य में हमारी जेब से कोई रुपया खर्च नहीं होगा, राजस्थान सरकार के बहुत से ऎसे विभाग हमारे इस पुण्य कार्य के लिये रुपया खर्च करने को तैयार हैं।       राजस्थान सरकार ने वर्तमान में विभिन्न विभागों के माध्यम से एक सौ से अधिक ऎसी योजनाएं चला रखी हैं जिनके माध्यम से आप गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता दिलवा सकते हैं। झालावाड़ जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने इन योजनाओं में से 89 ऎसी योजनाएं चुनकर एक पुस्तिका तैयार करवाई है जो पूरी तरह से जन्मजात कन्याओं से लेकर, स्कूली बालिकाओं, प्रौढ़ महिलाओं, विधवाओं, एकल महिलाओं, परित्यक्ताओं तथा वृद्धाओं के लिये समर्पित हैं। इनमें से 40 योजनाएं प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभागों के माध्यम से, 28 योजनाएं सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग के माध्यम से,           15 योजनाएं श्रम कल्याण विभाग के माध्यम से, 3 योजनाएं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से तथा 3 योजनाएं महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित की जाती हैं। मैं यहां केवल तीन बड़ी योजनाओं की चर्चा कर रहा हूँ जिनका लाभ आप किसी गरीब परिवार को तुरंत दिलवा सकते हैं। वह परिवार जीवन भर आपका अहसानमंद रहेगा। राजश्री योजना राजस्थान सरकार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से 1 जून 2016 से राजश्री योजना आरम्भ की है। इस योजना में किसी महिला को चिकित्सा संस्थान में पुत्री को जन्म देने पर तुरंत 2500 रुपये दिये जाते हैं। बालिका के जन्म की प्रथम वर्षगांठ पर पुनः 2500 रुपये दिये जाते हैं। जब बालिका किसी सरकारी स्कूल में कक्षा 1 में प्रवेश लेती है तो उसे 4000 रुपये दिये जाते हैं। बालिका द्वारा कक्षा 5 में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये, कक्षा 10 में प्रवेश लेने पर 11 हजार रुपये तथा कक्षा 12 उत्तीर्ण करने पर 25 हजार रुपये की राशि बालिका की मां को दी जाती है। इस प्रकार एक बालिका के पालन-पोषण के लिये उसकी मां को पचास हजार रुपये दिये जाते हैं। एक माता को यह सहायता दो बालिकाओं तक के लिये दी जा सकती है। इस बालिका को जननी शिशु सुरक्षा योजना के अंतर्गत मिलने वाले 1400 रुपये (ग्रामीण क्षेत्र में) अथवा 1000 रुपये (नगरीय क्षेत्र में) अलग से मिलेंगे तथा अन्य विभागों से मिलने वाली योजनाओं का लाभ भी मिलेगा। प्रसूति सहायता योजना यदि कोई महिला श्रम कल्याण विभाग में श्रमिक के रूप में पंजीकृत है तो उसके प्रथम प्रसव में लड़का होने पर 20 हजार रुपये तथा लड़की होने पर 21 हजार रुपये श्रम कल्याण विभाग द्वारा दिये जाते हैं। पुत्री के जन्म के समय माता की आयु कम से कम 20 वर्ष होनी चाहिये तथा पुत्री का जन्म किसी चिकित्सा संस्थान में होना चाहिये (घर पर नहीं)। कोई भी श्रमिक महिला प्रथम दो प्रसवों पर अर्थात् जीवन में कुल दो बार यह सहायता राशि प्राप्त कर सकती है। इसके लिये श्रम कल्याण विभाग में आवेदन करना होता है। विवाह सहायता योजना यदि कोई महिला श्रम कल्याण विभाग में निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीकृत है तो वह अपनी दो पुत्रियों के विवाह के लिये 55-55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता, उस पुत्री के 18 साल अथवा उससे अधिक आयु होने पर श्रम विभाग से ले सकती है। इसके लिये 18 साल पूरे करने वाली लड़की का आठवीं पास होना जरूरी है। आसान है श्रमिक के रूप में पंजीयन करवाना      जो स्त्री या पुरुष साल भर में किसी संस्थान में, किसी के घर पर या किसी ठेकेदार के पास कम से कम 100 दिन तक निर्माण श्रमिक के रूप में मजदूरी करते हैं, वे अपना पंजीयन श्रम कल्याण विभाग में आसानी से करवा सकते हैं। पांच साल के पंजीयन के लिये 85 रुपये पंजीयन शुल्क लगता है।

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